Monday, April 20, 2009

वो मुझे इग्नोर करती है कभी मेरा नाम तक नहीं लेती

एक आदमी रात के अंधकार में कमरे के अंदर अकेला घूम रहा है। आदमी बुजुर्ग है। हालांकि मानने को तैयार नहीं है। चांद निकली है। रूई के समान बड़ी बड़ी मूंछें ओठों के उपर रखी हैं। देखने से ही लगता है कि आदमी की नींद उड़ चुकी है। आदमी कई बरसों से सोया नहीं है। हो सकता है पंाच बरसों से न सोया हो। कई लोगों का कहना है कि पांच बरस पहले भी ये सोता नहीं था पर किसी को पता नहीं था कि ये जाग रहा है। उस समय भी इसकी नींद हराम थी।
ये आदमी कौन है ? आखिर चाहता क्या है ? वो बार बार एक गोरी महिला की तस्वीर के पास जाता है। उसे चुनौती देता है। तू सामने तो आ फिर मैं बताउंगा। कभी कभी मुक्का दिखाता है। रात में कई बार नाम ले लेकर कोसता है। फिर उठता है और कुर्ता पाजामा उतारकर खाकी हाफ पेंट पहन लेता है। नमस्ते सदा वत्सले करता है। कमरे में घूमता रहता है। फिर नागपुर फोन लगाता है। काफी देर तक घंटी जाती है मगर फोन कोई नहीं उठाता। वापस आकर फिर जोधपुरी कोट पेंट पहन लेता है। आदमकद आईने के सामने खड़ा हो जाता है। काफी देर तक अपने को निहारता रहता है। आखिर मुझमें क्या कमी है ? उसके पास एक पगड़ी भी है उसे लगाकर देखता है। केवल दाढ़ी नहीं है वरना दिखता तो मैं भी वैसा ही हूं। अंग्रेजी मैं भी बढ़िया बोल लेता हूं। बल्कि मुझे हिन्दी आती है और उसे नहीं आती। फिर मुझमें क्या कमी है।
अचानक सिर धुनने लगता है। फिर कुछ नहीं सूझता। क्या करूं ? कहां जाऊं ?
एक परकीय काया का प्रवेश
प्रश्न: तेरा कष्ट क्या है बाबा ?
उत्तर: एक कष्ट हो तो बताऊं ?
प्रश्न: चलो एक ही बता दो ।
उत्तर: मैं उसे इतना कोसता हूं मगर वो मेरा नाम तक नहीं लेती। इससे मेरी खीझ और बढ़ जाती है। मैं आधा घंटा भाषण देता हूं तो सौ बार उसका नाम लेता हूं। वो एक घंटा भाषण देती है तो भी मेरा नाम तक नहीं लेती। मुझे इग्नोर करती है।
प्रश्न: और बोलो
उत्तर: ये इतने कठिन समय चुनाव हो रहे हैं कि कोई मुद्दा ही नहीं है। बड़ी मुश्किल से अपने गठबंधन और अपनी पार्टी के लोगों को तैयार किया कि एक मुद्दा तो ये मान लो कि देश के सामने सबसे बड़ी समस्या मेरी बढ़ती उम्र है। यदि इस बार भी नहीं बना तो अगला जन्म कब होगा कब मैं बड़ा होउंगा कब मैं प्रधानमंत्री बनूंगा ? साले सब गठबंधन वाले छोड़के चले गये। जोे बचे हैं वो चोरी छुपे कहते हैं कि अपनी तो सरकार नहीं बनना ये प्रधानमंत्री कहां से बनेंगे। कह दो कि हां बुढऊ तुम्हीं प्रधानमंत्री बनोगे। जाता क्या है। मेरी पार्टी के लड़के कहते हैं जब तक ये रहंेगे किसी को न बनने देंगे इसीलिए काहे को पंगा लें ?
प्रश्न: और बोलो बाबा
उत्तर: जब प्रधानमंत्री का तय हो गया तो मैंने आतंकवाद का मुद्दा उठाया तो ये कहते हैं कि कंधार कांड के बारे में क्या कहा्रेगे ? तब क्या कर रहे थे। बुरा फंसा दिया है।
बड़ी मुश्किल से एक और मुद्दा पकड़ के लाया। स्विस बैंक वाला। कहा देश का पैसा देश में लाओ। तो अपने ही लोग पीछे पड़ गये। कहने लगे सर जी अब ज्यादा न उछालो इस मामले को। हम लोगों की मेहनत की कमाई का पैसा है जो वहां जमा किया है। जब चंदा लेते हो तब नहीं पूछते धन कैसा है काला है कि सफेद है। ज्यादा स्विस बैंक स्विस बैंक करोगे तो नीचे से दरी खींच देंगे। एक तो तुम जैसी हारी हुई बाजी पर पैसा लगाएं और तुम हमारी जेब कटवाओ। रहने दो हमें नहीं लड़वाना तुम्हें चुनाव।
प्रश्न: और बोलो बाबा, बोलते जाओ। आज मन की पूरी भड़ास निकाल लो। कम से कम चैन से सो तो सकोगे।
उत्तर: एक वो वरूण गांधी है। लड़का है। उसे लगा कि वहां राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन सकता है तो यहां इस तरफ से मैं क्यों नहीं बन सकता। उसकी थोड़ी रस्सी क्या छोड़ी वो तो पूरी पाटीं के कपड़े नुचवा बैठा। उधर नरेन्द्र मोदी अलग उम्मीद से है। मुंह चलाना मैंने सिखाया आज ये मेरी ही रोजी रोटी छीनने में जुटे हैं। वरूण को बोला था कि थोड़ा माहौल गर्म करो मगर उसने तो आग ही लगा दी।
मैंने सोचा कि मनमोहन सिंह तो अर्थशास्त्री हैं। भाषण देना तो आता नहीं। उनको खुली बहस की चुनौती दे दी। मैंने सोचा कि अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव जैसी वाद विवाद प्रतियोगिता हो जाये तो मैं जीत जाऊंगा। मगर वो मुकाबले के लिए उतरे नहीं कहने लगे कि संसद में जब बोलने का मौका आता है तब या तो उपद्रव करते हो या बायकाट करते हो। हम तुमसे टी वी में क्यों बहस करें। हम तो तुम्हें प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार मानते ही नहीं।
प्रश्न: फिर
उत्तर: फिर मैंने सोनिया को चुनौती दी
प्रश्न: फिर
उत्तर: (फूट फूट कर रोने की आवाज आती है।) उसने मेरी चुनौती सुनी तक नहीं। वो मुझे इग्नोर करती है। कभी मेरा नाम तक नहीं लेती। मैं उसे देख लूंगा।
प्रश्न: मगर कब ?
इतना कह कर वह परकीय आत्मा उड़ गई। बुजुर्ग फिर कमरे मैं बेचैन चक्कर लगा रहे हैं।
....................................सुखनवर

7 comments:

वन्दना अवस्थी दुबे said...

शानदार शुरुआत के लिये बधाई..शुभकामनायें.शब्द-पुष्टिकरण हटा लेंगे तो टिप्पणीकारों को आसानी होगी.

गोविंद गोयल, श्रीगंगानगर said...

narayan... narayan... narayan

shama said...

Anek shubhkamnayon sahit swagat hai..
shama

अनिल कान्त said...

बहुत शानदार शुरुआत की है ....आपका स्वागत है

मेरी कलम - मेरी अभिव्यक्ति

Sanjay Grover said...

हुज़ूर आपका भी एहतिराम करता चलूं ..........
इधर से गुज़रा था, सोचा, सलाम करता चलूंऽऽऽऽऽऽऽऽ

ये मेरे ख्वाब की दुनिया नहीं सही, लेकिन
अब आ गया हूं तो दो दिन क़याम करता चलूं
-(बकौल मूल शायर)

रचना गौड़ ’भारती’ said...

अच्छा लिखा

MAYUR said...

अच्छा लिखा है आपने और सत्य भी , शानदार लेखन के लिए धन्यवाद ।

मयूर दुबे
अपनी अपनी डगर